ए भगत तेरी सहादत ..... मरते दम तक याद रहेगी ... य
हर रोज की भांति आज जिंदा हूँ.....कल भी था ..... आज भी हूँ....चेहरे बदले . हैं आज भी स्वत्रंत परिंदा हूँ.....बस फर्क है .... महसूस करने में ...दिल की बातें ... जुबान पे लाने में .....मिट्टी के कण-कण में .....आज भी सना हूँ.....हर रोज की भांति आज जिंदा हूँ.....
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