खुद से तो खुदा भी परेशान
जरूरत न हो तो ....ज़िंदगी भी आसान ....
फर्क की वजह यू ही ढूंढते हैं.....
भ्रम में खुद को यू ही सोचते हैं....
है जज्बा तो इस रफ़्तार को पहचान ....
जरूरत न हो तो ....ज़िंदगी भी आसान ....
खुद से तो खुदा भी परेशान .....
वक़्त कि बेड़ियाँ किसे कब बांधती है !
हो बुलंद आवाज तो खुदा भी मानती है...
न कर इस सच्चे दिल को बेईमान .....
जरूरत न हो तो ....ज़िंदगी भी आसान ....
खुद से तो खुदा भी परेशान .....
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