मंगलवार, 2 जुलाई 2013

जागो सवेरा हो गया॥ wake up seeds.......: अहले सुबह .... मुझसे न टकराओ ........

जागो सवेरा हो गया॥ wake up seeds.......: अहले सुबह .... मुझसे न टकराओ ........: अब लगता है ... खुद को बदल नहीं पाऊँगा !! मेरे खयाल से कोई भी खुद को बदल नहीं सकता ... हाँ खुद को सँवारने की क्षमता हर किसी के पास होती है...

अहले सुबह .... मुझसे न टकराओ ........

अब लगता है ... खुद को बदल नहीं पाऊँगा !! मेरे खयाल से कोई भी खुद को बदल नहीं सकता ... हाँ खुद को सँवारने की क्षमता हर किसी के पास होती है, बस समझने भर का फेर है।
                 
                                 आज जैसे युवा वाले अच्छे गुण मेरे पास हैं ही नहीं.... की खुद के डोले सोले बनाऊ॥ लेकिन फिट -फाट रहना चाहता हूँ... जिसके लिए बस सोचता ही रहता हूँ,,,, कर्म की स्थिति तो डामाडोल है। प्रयासरत हूँ ..... जैसे हमारी सरकार..... आर्थिक गतिविधियों पे नजर डाले सोच रही है। बहुतेरे ऐसे मेरे जैसे हमारे देश में हैं.... और आने वाले समय में बहुमत में रहेंगे .... जिस तरह से खुद को संयमित नहीं कर पाते भला देश के प्रति क्या खाक करेंगे ....
                                         
                                               एक बात है खुद को कोसने में बड़ा मजा आता है मुझे..... और कभी-कभी मेरे लिए लाभदायक भी सिद्ध होता है.... काश आज देश की सत्ता में रहने वाले भी कोसते !! तो देश को भी विकास की राह मिल ही जाती। आज जिस फेर बदल की शिकार हमारी लोकतन्त्र राजनीति हो गई है, उसे देख के लगता है कि कोई माँ - बाप सरगेसी पे निर्भर हो गया है... संतान कि चाह तो रखता है पर ज़िम्मेदारी से भागता है.......  हे राजनीति के ईश्वर .... इस देश को सत्ता सरगेसी से बचाना ....... नहीं तो पूरा देश नेतृत्व के बांझ से ग्रसित होगा........